सबद - 74


सबद - 74

           ओ३म् कड़वा मीठा भोजन भख ले । भख कर देखत खीरूं । धर आखरडी साथर सोवण । ओढण ऊना चीरूं । सहेज सोवण पोह का जागण । जे मन रहिबा थीरूं । सुरग पहेली सांभल जिवड़ा । पोह उतरबा तीरूं ॥७४॥