सबद-42


सबद-42

ओ३म् आयसां काहे काजै खेह भकरूड़ो । सेवो भूत मसांणी ।। घड़े ऊंधै बरसत बहु मेहा । तिहिंमा कृष्ण चरित बिन पड़यो न पड़सी पाणी । योगी जंगम नाथ दिगम्बर संन्यासी ब्राह्मण ब्रह्मचारीं ।। मन हट पढिया पंडित । काजी मुल्ला खेलै आपद वारी ।। निश्चै कायूं वायों होयसैं । जे गुरु बिन खेल पसारी ।।४२।।