सबद-115
ओ३म् म्हे आप गरीबी तन गूदड़ियों । मेरा कारण किरिया देखो ।। बिन्दो ब्योहरो ब्योर विचारो । भूलस नाही लेखों ।। नदिये नीरूं सागर हीरूं । पवणा रूप फिरै परमेश्वर ।। बिंबै बेला निश्चल थाघ अथाघूं । उमग्या समाघूं । ते सरवर कित नीरूं ।। गहर गंभीरू । खिण एक सिद्धपुरी विश्राम लियों ।। अब जु मंडल भई अवाजूं । म्हे शून्य मंडल का राजू ।।११५।।